स्वास्थ्य के लिए अमृत गोंद कतीरा -Gond katira

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gond katira
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स्वास्थ्य के लिए अमृत गोंद कतीरा 

  • कई रोगो में राम बाण गोंद कतीरा पेड़ से निकाला जाने वाला गोंद है। इसका कांटेदार पेड़ भारत में गर्म पथरीले क्षेत्रों में पाया जाता है।
  • इसकी छाल काटने और टहनियों से जो तरल निकलता है वही जम कर सफ़ेद पीला हो जाता है और पेड़ की गोंद कहलाता है।
  • इसे इंग्लिश में Hog Gum कहते है। यह स्वाद में फीका होता है ,रात भर भिगोकर रखने पर यह ट्रांसपेरेंट  हो जाता है
  • गोंद कतीरा तासीर में ठंडा है, इसलिए गर्मी में इसका सेवन करें। सर्दी में सेवन उचित नहीं माना जाता।
  • इसके सेवन से शरीर में ताक़त बनी रहती है पेशाब में जलन और पेशाब सम्बंधित बीमारी में यह रामबाण की तरह काम करता है
  • गोंद कतीरा का प्रयोग विभिन्न प्रकार के रोगों को दूर करने के लिए किया जाता है।

गोंद कतीरा के औषधीय गुण :

  • गोंद कतीरा शरीर के खून को गाढ़ा करता है, हृदय की कठोरता को दूर करता है।
  • आंतों की खराश को दूर करके बलवान बनाता है।
  • यह शरीर से निकलने वाले खून को रोकता है,
  • सांस रोग को दूर करता, खांसी को नष्ट करता व कफ दूर करता है।
  • यह छाती की खरखराहट और फेफड़ों के जख्मों को खत्म करता है।
  • इसका प्रयोग जहर को उतारने के लिए भी किया जाता है विशेषकर गर्म मिजाज वालों व्यक्ति के जहर को।
  • पेशाब की जलन, मासिकस्राव का कम आना, हाथ-पैरों की जलन, सिर की जलन, खुश्की, अधिक प्यास लगना आदि रोग ठीक होते हैं।
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गोंद कतीरा के लाभ :

  • गोंद कतीरा रात को एक गिलास पानी में भिगोकर रख दें और सुबह इसमें मीठा  मिलाकर सेवन करें। इससे हाथों-पैरों की जलन दूर होती है। इसका प्रयोग गर्मियों में बहुत ही लाभदायक है।
  • अगर शरीर अधिक गर्म महसूस हो तो कतीरा को पानी में भिगोकर मिश्री मिले शर्बत के साथ घोटकर सुबह-शाम सेवन करें। इससे शरीर की गर्मी दूर होती है। इसके सेवन करने से गर्मियों में लू से बचा जा सकता है।
  • थकान, कमजोरी, गर्मी की वजह से चक्कर आना, उल्टी और माइग्रेन जैसी समस्याओं में भी गोद कतीरा काफी फायदेमंद होता है। नियमित रूप से प्रात: आधा गिलास दूध में कतीरा गोंद कूटकर डालें और मिश्री डालकर सेवन करें।  पित्त ठीक हो जायेगी।
  • कतीरा गोंद का सेवन महिलाओं की समस्याए जैसे बच्चा होने के बाद की कमजोरी,माहवारी की गड़बड़ी या ल्यूकोरिया आदि की समस्या को ठीक करता है। यह कमजोरी और उसके कारण होने वाली शारीरिक अनियमिताओं को ठीक करता है। गोंद कतीरा तथा मिश्र को सम -मात्रा में मिलाकर पीस लें और 2 चम्मच की मात्रा में कच्चे दूध के साथ सेवन करें |
  • गोंद कतीरा में भरपूर मात्रा में प्रोटीन और फॉलिक एसिड जैसे पोषक तत्व पाएं जाते है। गोंद कतीरा शरीर के खून को गाढ़ा करता है। 10 से 20 ग्राम गोंद कतीरा रात को पानी में भिगो दें और सुबह उसी पानी में मिश्री मिलाकर शर्बत बनाकर सेवन करें। इससे खून की कमी दूर होती है।
  • लगभग 4 ग्राम मेंहदी के फूल और लगभग 3 ग्राम कतीरा को मिट्टी के बर्तन में भिगोकर रख दें और सुबह मिश्री के साथ पीस कर पीएं। इससे सिर दर्द / माइग्रेन के अलावा जलन और सिर के बालों का झड़ना भी बंद होता है।
  • 2 भाग कतीरा और 2 भाग नानख्वा को बारीक पीसकर धनिये के पत्तों के रस में मिलाकर प्रतिदिन गले पर लेप करने से कंठमाला (गले की गांठ) में आराम मिलता है।
  • अगर आपको बार बार टांसिल की समस्या हो जाती है तो 2 भाग कतीरा और 2 भाग नानख्वा को बारीक पीसकर धनिये के पत्तों के रस में मिलाकर रोजाना गले पर लेप करने से आराम मिलता है। लगभग 10 से 20 ग्राम कतीरा को पानी में फुला लें और फिर इसे मिश्री मिले शर्बत में मिलाकर सुबह-शाम पीएं। इससे गले के रोगों में पूरा लाभ मिलेगा |
  • स्वप्नदोष के लिए १०-१५ दिन तक 10 ग्राम से 20 ग्राम गोंद कतीरा सुबह शाम फुलाकर मिश्री के साथ शर्बत घोल कर इसके सेवन से स्वप्न दोष में लाभ होता है।
  • 10 ग्राम से 20 ग्राम गोंद कतीरा सुबह शाम फुलाकर मिश्री के साथ शर्बत घोटकर पीने से मूत्ररोग में लाभ मिलता है।
कृपया ध्यान दें उपलब्ध सभी साम्रगी केवल पाठकों की जानकारी और ज्ञानवर्धन के लिए दी गई है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। Read More

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