प्लास्टिक चावल से कैंसर का खतरा – ऐसे पहचाने प्लास्टिक चावल

0
2423
प्लास्टिक चावल से कैंसर का खतरा - ऐसे पहचाने प्लास्टिक चावल
प्लास्टिक चावल से कैंसर का खतरा - ऐसे पहचाने प्लास्टिक चावल

नैचुरल चावल के साथ मिलकर बेचा जा रहा है मार्केट में।

प्लास्टिक चावल पर इन दिनों सोशल मीडिया में खूब चर्चा हो रही है। चूँकि चावल फ़ूड प्रोडक्ट है और पूरे देश में इसका यूज़ होता है, लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि चीन से आ रहा यह प्लास्टिक का चावल नैचरल चावल से बिलकुल अलग होता है। डॉक्टरों का कहना है कि एक दो बार खाने में जहां इससे डरिया , वोमिटिंग, पेट दर्द हो सकता है , वहीँ लंबे समय तक यूज़ करने से लीवर का कैंसर तक हो सकता है।
जानकारों का कहना है कि प्लास्टिक चावल को नैचरल चावल में मिक्स करके बेचा जा रहा है, यह एक प्रकार की मिलावट है, क्योकि प्लास्टिक चावल का साइज और कलर बिलकुल एक ही तरह होता है। इसलिए इनकी पहचान करना आसान नहीं है।  सूत्रों का कहना है कि अगर प्लास्टिक के चावल मिक्स करने की बजाये अलग से बेचा जायेगा तो उसकी पहचान संभव है। सूत्रों का कहना है कि आलू, शलगम और प्लास्टिक को मिला कर इस तरह का चावल बनाया जाता है। फिर इसमें रेजिन मिलाई जाती है।  रजिन पेड से निकलने वाला एक तरह का हयड्रोकार्बन द्रव्य है, जिसका इस्तमाल आमतौर पर गुब्बरा और प्लास्टिक की दूसरी चीज़े बनाने में किया जाता है। इन  चीजों को मिला कर चावल का आकार दिया जाता है।
गंगाराम हॉस्पिटल के गैस्ट्रोलॉजी डिपार्टमेंट के एच ओ डी डॉक्टर अनिल अरोड़ा ने कहा कि जब बॉडी के अंदर कोई फ़ॉरेन प्रोडक्ट जाता है तो बॉडी उसके साथ रिएक्ट करती है। प्लास्टिक के बने सामान में कलरिंग और कोटिंग एजेंट होता है , इसमें कई  तरह के केमिकल्स होते है। प्लास्टिक के जरिए जब केमिकल बॉडी मैं पहुंचते है तो रिएक्शन होता है, इसकी वजह से इंटेस्टियन ट्रैक डैमेज हो सकता है, अल्सर हो सकता है, इसके आलावा इन केमिकल्स को लीवर अब्जॉर्ब कर लेता है , इससे लीवर डैमेज हो जाता है और लीवर कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। इस बारे में बीएलके सुपर स्पेसिलिटी की डायटीशियन सुनीता रॉय चौधरी कहती है कि प्लास्टिक ऐसा प्रोडक्ट है जो न तो गलता है और न ही सड़ता है।  आमतौर पर जब बॉडी के अंदर खाने का कुछ सामान जाता है तो बॉडी उसे पचाने के लिए के लिए एग्ज़ीमा छोड़ती है , लकिन उन एग्ज़ीमा का प्लास्टिक पर कोई असर नहीं होता है , जब कोई रेगुलर ऐसे प्लास्टिक चावल खायेगा तो वह बॉडी में जमा होता रहेगा और उससे इंटस्टाइन ब्लॉक हो सकता है।

इसे भी पढ़ेंः    शरद पू्र्णिमा - Sharad Purnima मां लक्ष्मी पूजा करने वालों पर बरसाएंगी धन

कैसे पहचाने प्लास्टिक चावल 

  • प्लास्टिक चावल साइज और कलर बिलकुल एक ही तरह होता है।
  • आलू , शलगम और प्लास्टिक को मिलाकर नकली चावल बनाये जाते है।
  • प्लास्टिक ऐसा प्रोडक्ट है जो न तो गलता है और न ही सड़ता है।
  • चावल की खुशबु से असली और नकली में पहचान की जा सकती है।
  • प्लास्टिक चावल में कोई खुशबु नहीं होती है, मिलावट ज्यादा होगी तो पकने प्लास्टिक जैसी गंध आएगी।
  • पकते समय सूंघ कर इसे पहचाना जा सकता है।
  • चावल को थोड़ा उबालने बाद फैला कर रखने चल सकता है।
  • पका हुआ चावल दबाने  असली चावल दब जाएगा , जबकि नकली नहीं दबेगा।
  • प्लास्टिक राइस पकने के बाद कठोर ही रहता है।
  • यह चावल पेट में जा कर ना तो पचता है और न ही सड़ता है।
  • असली चावल जल्दी टूट जाता है , लेकिन प्लास्टिक वाला नहीं टूटता है।

source – Delhi NBT

कृपया ध्यान दें उपलब्ध सभी साम्रगी केवल पाठकों की जानकारी और ज्ञानवर्धन के लिए दी गई है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। Read More