योग मुद्रायें के फायदे – Live healthy life https://livehealthylife.in Live Healthy Live Long Thu, 14 Mar 2024 03:57:14 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.2.11 https://livehealthylife.in/wp-content/uploads/2017/02/logo-150x150.png योग मुद्रायें के फायदे – Live healthy life https://livehealthylife.in 32 32 Namaskar mudra yoga | प्रणाम मुद्रा (नमस्कार मुद्रा) के हैरान कर देने वाले लाभ व महत्व https://livehealthylife.in/namaskar-mudra-yoga/ https://livehealthylife.in/namaskar-mudra-yoga/#respond Thu, 14 Mar 2024 03:57:14 +0000 https://livehealthylife.in/?p=74477 पहले के समय जब भी किसी से मिलते थे तो आदर स्वरुप दोनों हाथों को जोड़कर नमस्कार किया जाता था .
क्योंकि बड़े लोग जानते थे कि इससे अनेकों लाभ होते हैं ।

हम नमस्कार मुद्रा का प्रयोग प्रार्थना, ध्यान, मंत्र उच्चारण या किसी अतिथि के आने पर उसके स्वागत – सम्मान के लिए करते हैं, आजकल की समय में हम तो नमस्कार की मुद्रा बनाना भी भूल गए हैं।

चलिए जानते हैं अपनी भारतीय संस्कृति में मुद्रा को अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान क्यों दिया गया है।

नमस्कार की मुद्रा बनाने के लिए हमें दोनों हाथ जोड़कर अंगूठे से अंगूठे को मिलाकर सीने के मध्य भाग जहां आत्मा का निवास माना जाता है उससे लगाना होता है। दोनों अंगूठों को आपस में मिलाकर कमल के फूल की भांति एक मुद्रा बनती है।

यही नमस्कार का की मुद्रा, यदि चाहे तो हाथों को सर के ऊपर की और सीधे जोड़कर भी आगे नमस्कार की मुद्रा ला सकते हैं।
इसके नित्य अभ्यास से दोनों हाथों को जोड़ने से अनेकों लाभ होते हैं।

चलिए आज इन लाभों को जानने का प्रयास करते हैं

प्रणाम मुद्रा करने से हाथों की मस्तिष्क संधि और मस्तिष्क की स्थिरता बढ़ती है। यह शारीरिक और मानसिक संतुलन को बढ़ावा देता है।

नमस्कार मुद्रा के लाभ

  1. नमस्कार मुद्रा से विनम्रता के भाव उत्पन्न होते हैं
  2. अहंकार मिटता है ।
  3. नमस्कार मुद्रा को करते समय मन को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। यह बुद्धि का विकास और ध्यान को बढ़ावा देती है।
  4. हमारी याददाश्त बढ़ती है।
  5. आलस्य दूर होता है।
  6. सक्रियता आती है शरीर में आलस दूर भाग जाता है।
  7. रक्त शुद्ध होता है।
  8. शरीर स्वस्थ होता है हष्ट पुष्ट होता है।
  9. तनाव दूर हो जाता है।
  10. सूर्य नमस्कार की पहली स्थिति भी नमस्कार मुद्रा से ही शुरू होती है और यह हमें आंतरिक रूप से मजबूत बनाता है

नमस्कार मुद्रा

इन सभी लाभों के साथ, नमस्कार मुद्रा को नियमित रूप से करने से शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य में सुधार होता है। यह आध्यात्मिक साधना के एक महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में भी मानी जाती है।

हिन्दू धर्म में इसी कारण नमस्कार मुद्रा अपनाई जाती है — पूजा में , निवेदन के लिए इस मुद्रा के द्वारा ही हम प्रार्थना करते हैं।
नित्य भी इसका अनेकों जगह प्रयोग किया जाता है किसी को श्रद्धांजलि देते हुए भी हम नमस्कार की मुद्रा में झुक कर ही किसी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।
इसलिए आज से ही अपने भारतीय संस्कृति को जानते हुए, फिर से अधिक से अधिक इस नमस्कार मुद्रा का प्रयोग आरम्भ करें और अपनी सभ्यता, संस्कृति को पुनः जीवित करें।
समान मुद्रा के लाभ

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योग मुद्रायें कैसे करती है लाभ Benefits of yog mudras https://livehealthylife.in/benefits-of-yog-mudras/ https://livehealthylife.in/benefits-of-yog-mudras/#respond Fri, 22 Jul 2022 03:23:32 +0000 https://livehealthylife.in/?p=5539 योग मुद्रायें कैसे करती है लाभ

मुद्रा का अर्थ है शरीर के हाव भाव

योग -आसन और प्राणायाम के मेल से बनता है।

ऋषि मुनियो द्वारा मुद्राओ को आसनो का एक रूप माना  गया है  , इन्हे आयुर्वेद के अनुसार आरोग्य का धन भी माना गया है।

पुराने समय में  योगी-मुनि  कुण्डलिनी को जागरण  के लिए योग-आसन और प्राणायाम के  साथ -साथ योग मुद्राओं  का अभ्यास करते थे और ध्यान और समाधी की अवस्था को प्राप्त करते थे।

मुद्राओं से  शारीरिक और मानसिक दोनों तरह की शक्तियों का विकास होता हैं। आसन द्वारा  जहाँ शरीर बलिष्ठ  होता है ,वही  मुद्राओं के  नियमित अभ्यास द्वारा  कई तरह के रोग दूर होते हैं,मन की चंचलता दूर होती है  हम मानसिक रूप से बलिष्ठ और सशक्त होते है और ध्यान की अवस्था को प्राप्त करते थे।

क्योंकि योग आसन करते समय इन्द्रियों की भूमिका ज्यादा और प्राणों की कम होती है।

जबकि मुद्राओं करते समय इन्द्रियों की भूमिका कम होती है ,और प्राणों की ज्यादा होती है।

नित्य की  दिनचर्या में भी हम अपने शरीर और मन को स्वस्थ रखने के लिए इन क्रियाओं का  अभ्यास कर सकते हैं। इसमें हाथों की उँगलियों को सपर्श करके  आंतरिक शक्ति से प्राणों का संचार करके  शरीर को स्वस्थ किया जाता है।

हमारा शरीर पांच तत्वों से बना हुआ है–

जब ये पाँचों तत्व सामान्य अवस्था  में विद्यमान रहते हैं तो हम  निरोगी  रहते  है और यदि इनका  संतुलन बिगड़ जाये तो शरीर ,में  रोग उत्पन्न हो जाते हैं।नियमित दिनचर्या में इन मुद्राओं द्वारा हम अपने शरीर का संतुलन बनाए  रख सकते है

आइये जाने हाथ की पांच उंगलियाँ पांचो तत्वों का प्रतिनिधित्व इस तरह करती है —

फीविलेमेंटसीनोरह

  1. अंगूठा : अग्नि
  2. तर्जनी : वायु
  3. बीच वाली ऊँगली : आकाश
  4. अनामिका : पृथ्वी
  5. छोटी ऊँगली : जल 

 

आयुर्वेद में मुख्य रूप से 11 तरह की मुद्राएँ बताई गई हैं—-

    1. ज्ञान मुद्रा / ध्यानमुद्रा
    2. वायुमुद्रा
    3. शून्यमुद्रा
    4. पृथ्वीमुद्रा
    5. प्राणमुद्रा
    6. अपानमुद्रा
    7. अपानवायु मुद्रा
    8. सूर्यमुद्रा
    9. वरुणमुद्रा
    10. लिंगमुद्रा
    11. धारणाशक्ति मुद्रा

हमारे अन्य लेखों  में इन मुद्राओं के बारे में विस्तृत रूप से बताया गया है।

 

 

 

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